Hindi Poetry (बीत गए जो किस्सा बनकर)


बीत गए जो किस्सा बनकर

बीत गए जो किस्सा बनकर
उस पलछिन की बात बड़ी है ।
रीत गए जो परिणामों में
उस मेहनत की जात खड़ी है ।

आने वाला है उजियारा 
बोल रहा धुंधला अंधियारा ।
गीत सुहाने इस जीवन के
साँसें गाये पी अंगारा ।
सपनों के भी आगे जाकर
एहसासों की रात चढ़ी है ।
रीत गए जो परिणामों में
उस मेहनत की जात खड़ी है ।

ऊपर-नीचे बाँयें-दाँयें 
इधर-उधर से हिम्मत लेकर ।
ईमानी चौखट की खातिर
जो बन पाया कीमत देकर ।
बंजर दिल को सींच सींचकर
नव अंकुर की आस बढ़ी है ।
रीत गए जो परिणामों में
उस मेहनत की जात खड़ी है ।

Writing BY :- Er Durga Nand Yadav


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