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जीतिया व्रत
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जीतिया व्रत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत युद्ध के दौरान अपने पिता की मृत्यु के बाद अश्वत्थामा बहुत नाराज थे। इस दुख और नाराजगी के चलते उनके मन में बदले की भावना भड़क रही थी। अपनी इसी क्रोध के आगे विवश होकर वे पांडवों के शिविर में घुस गए। जब वह अंदर गए तो उन्होंने देखा कि शिविर के अंदर 5 लोग सो रहे थे। जिसे उन्होंने पांडव समझ कर मार डाला। परंतु असल में वे सभी द्रोपदी की पांच संताने थी। कहा जाता है कि इसके बाद अर्जुन ने उन्हें बंदी बनाकर उनकी दिव्यमणि छीन ली। जिसके बाद अश्वत्थामा ने बदला लेने के लिए अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को/गर्भ को नष्ट कर दिया। मगर भगवान श्री कृष्ण ने अपने सभी पुण्य का फल उत्तरा की अजन्मी संतान को देकर उसको गर्भ में फिर से जीवित कर दिया। गर्भ में मर कर जीवित होने के कारण उस बच्ची का नाम जीवित्पुत्रिका पड़ा। कहा जाता है कि तब से ही संतान की लंबी उम्र और मंगल कामना के लिए जितिया का व्रत किया जाने लगाव्रत एक दूस...
प्लांट में पद बढ़ने के साथ भाषा क्यों बदल जाती ह ै?
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🏭 प्लांट में पद बढ़ने के साथ भाषा क्यों बदल जाती है? किसी भी प्लांट में जब कोई व्यक्ति Engineer से Senior Engineer, Manager या किसी ऊँचे पद पर पहुँचता है, तो उसकी जिम्मेदारी बढ़ती है। लेकिन कभी-कभी इसी के साथ उसकी बोलने की भाषा और व्यवहार भी बदल जाता है। जो व्यक्ति कल तक प्यार से बात करता था, आज वही “तू-तड़ाक” में बात करने लगता है। कॉन्ट्रैक्टर के लोगों से, फिट्टर से, हेल्पर से या अपने जूनियर से बात करते समय ऐसा लगता है जैसे पद के साथ इंसानियत भी नीचे रह गई हो। लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए— काम करवाने के लिए आवाज़ ऊँची करने की जरूरत नहीं होती, बात में स्पष्टता और व्यवहार में सम्मान होना चाहिए। हमने Diploma, Polytechnic और B.Tech. में केवल मशीन, डिजाइन, maintenance और production नहीं पढ़ा है। हमें Communication Skills, Teamwork, Leadership और Professional Behaviour भी सिखाया गया है। तो फिर प्लांट के अंदर पहुँचते ही हम इन skills को क्यों भूल जाते हैं? एक अच्छा Engineer वह नहीं है जिसके सामने लोग डरकर काम करें। अच्छा Engineer वह है जिसके सा...