महफ़िल शायरी
महफ़िल शायरी 1. महफ़िल में बैठे हैं, तो अंदाज़ भी ख़ास रखेंगे, दिल की बात होगी तो अल्फ़ाज़ भी ख़ास रखेंगे। जो समझ सके मेरी ख़ामोशी को, वही अपना है, वरना हम तो हर किसी से मुस्कुराकर बात रखेंगे। 2. महफ़िल में हमारी चर्चा हो, ये ज़रूरी तो नहीं, हर दिल में हमारा नाम हो, ये ज़रूरी तो नहीं। हम तो बस इतना चाहते हैं ऐ दोस्तों, जब याद आएँ, चेहरे पर मुस्कान ज़रूर हो। 3. कुछ लोग महफ़िल में भी तन्हा नज़र आते हैं, कुछ लोग ख़ामोश रहकर भी सबको भा जाते हैं। अंदाज़ अपना ऐसा रखो ऐ दोस्तों, लोग दूर होकर भी तुम्हें याद करते रह जाएँ। 4. जाम छलकते रहे, रात गुजरती रही, महफ़िल में आपकी कमी खलती रही। किसी ने पूछा—किसका इंतज़ार है? हमने कहा—जिसे याद करें, वही तो ख़ास है। ❤️