दुर्गा — एक छोटी सी रोशनी
दुर्गा — एक छोटी सी रोशनी
दुर्गा एक साधारण परिवार का मेहनती लड़का था। उसके पास बड़े सपने थे, लेकिन उन्हें पूरा करने के साधन बहुत कम थे।
हर दिन काम से लौटते समय वह गाँव की उसी अँधेरी सड़क से गुजरता था। एक रात उसने देखा कि सड़क के किनारे एक बुज़ुर्ग व्यक्ति अँधेरे में रास्ता खोज रहे थे।
दुर्गा ने बिना कुछ सोचे अपना मोबाइल निकाला और उन्हें घर तक छोड़ आया।
बुज़ुर्ग ने पूछा,
“बेटा, तुम्हें इतनी जल्दी घर जाने की जरूरत नहीं थी?”
दुर्गा मुस्कुराकर बोला,
“अगर मेरी छोटी-सी रोशनी किसी का रास्ता आसान कर सकती है, तो इससे बड़ी खुशी मेरे लिए क्या होगी?”
उस रात दुर्गा को एहसास हुआ कि जिंदगी में बड़ा बनने से पहले अच्छा इंसान बनना जरूरी है।
उसने ठान लिया कि वह जहाँ भी रहेगा, अपनी मेहनत और अच्छे व्यवहार से दूसरों के जीवन में थोड़ी-सी रोशनी जरूर लाएगा।
क्योंकि रोशनी हमेशा बड़ी नहीं होती…
कभी-कभी एक छोटा-सा दीपक भी पूरा रास्ता दिखा देता है।
— Writing By Er Durga
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